ज्योतिषीय शुक्र और आप

ज्योतिषीय शुक्र और आप *********************** ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जीवन में आवश्यकता से अधिक अर्थात भोग एवं विलासता के साधन और संसाधन की प्राप्ति के लिए शुक्र का अच्छा होना बहुत ही आवश्यक है...! यह मात्र एक वाक्य ही किसी व्यक्ति के जीवन में शुक्र के महत्त्व को बताने के लिए पर्याप्त है...! -------------------------------------- ज्योतिष में शुक्र, नैसर्गिक शुभ ग्रहों की श्रेणी में आता है और राजसिक गुण इसकी प्रकृति है...! 20 वर्षों की इसकी ज्योतिषीय दशा होती है और गोचर में यह एक राशि में लगभग 25 दिन रहता है...! कुंडली में गोचर में यह 2, 3, 4, 5, 8, 9, 11, 12 वें भाव को प्रभावित करता है अर्थात गोचर में सबसे ज्यादा शुभ फल यही दे सकता है और देता भी है...! कुंडली में यह सूर्य से 10 अंशों तक (सीधी गति में) और 8 अंशों तक (वक्री गति में) अस्त ही रहता है और मीन इसकी उच्च राशि और कन्या इसकी नीच राशि होती है...! बुध और शनि इसके नैसर्गिक मित्र हैं और सूर्य एवं चन्द्रमा इसका नैसर्गिक शत्रु है...! कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शुक्र दिग्बली ग्रहों की श्रेणी में आता है और शुभ फल देने के योग्य माना जाता है...! ----------------------------------- ज्योतिष में शुक्र से अनेकों योगों का निर्माण होता है लेकिन शुक्र के साथ चन्द्रमा या मंगल या राहु के होने को लेकर लोगों में कई प्रकार की भ्रांतियां हैं जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं हैं...! ------------------------------- ज्योतिष में शुक्र को विवाह, विवाहित सम्बन्ध, सुंदरता, भोग एवं विलासिता वाला जीवन, कला, संगीत, शारीरिक आकर्षण, आकर्षक व्यक्तित्व, गुप्त रोग के कारक के रूप में माना जाता है लेकिन विवाह एवं विवाहित जीवन में इसका विशेष महत्त्व माना एवं जाना जाता है...! ----------------------------- पुरुष और स्त्री दोनों के लिए और सभी उम्र में इसका शुभ होना बहुत जरूरी है अन्यथा जीवन में स्वास्थ के साथ साथ और बहुत सारी समस्याएं हो सकती हैं...! महिलाओं के लिए शुक्र विशेष होता है क्योंकि स्वास्थ, विवाह, पति, विवाहित जीवन के सुखों पर शुक्र का विशेष प्रभाव होता है अर्थात महिलाओं के लिए सुखद सौभाग्य का प्रतीक है ..! --------------------------------- ऐसी मान्यता है की यदि लग्न में शुक्र या चतुर्थ भाव में शुक्र हो तो वह व्यक्ति को बहुत कुछ दे सकता है लेकिन दे नहीं पाता है क्योंकि कभी दशा तो कभी गोचर तो कभी योग आड़े आ जाते हैं और ऐसे में यह अपने आपको असमर्थ पाता है या हो जाता है... ऐसा मेरा लम्बा ज्योतिषीय अनुभव भी है, कुछ लोग इस बात को मानते हैं तो कुछ लोग इसको नहीं मानते हैं लेकिन मैं तो इसको पूरी तरह मानता हूँ...! --------------------------------- अतः सभी जातकों से मेरा अनुरोध है कि आप अपने शुक्र के बारे में जरूर जानें और इसके साथ ही जीवन में इसकी शुभता में वृद्धि एवं अशुभता में कमी या शुक्र से अधिकतम लाभ एवं न्यूनतम हानि के लिए समय रहते किसी शिक्षित, ज्ञानी और अनुभवी ज्योतिषी से ही अवश्य संपर्क कर परामर्श प्राप्त करें...! 🙏🌹🌹🙏 अग्रिम शुभकामनायें ...! सुभाष वर्मा ज्योतिषाचार्य ज्योतिषाचार्य, नामशास्त्री, रंगशास्त्री, अंकशास्त्री, वास्तुशास्त्री, कुंडली, मुहूर्त --------------------------------- केवल ज्योतिष - चमत्कार नहीं आत्मविश्वास बढ़ाएं - अन्धविश्वास भगाएं -------------------------------------- www.astroshakti.in [email protected] www.facebook.com/astroshakti

Written & Posted By : Subhash Verma Astrologer
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