ज्योतिषीय राहु और आप

ज्योतिषीय राहु और आप ज्योतिषीय ग्रहों के परिवार में राहु को स्पष्ट मान्यता नहीं है क्योंकि इसको छाया ग्रह का दर्जा प्राप्त है या छाया ग्रह माना जाता है, इसलिए यह छाया की तरह कभी भी दृश्य या अदृश्य हो जाता है अर्थात यह किसी के भी जीवन में कभी भी कुछ भी कर सकता है, इसलिए यह अधिकांशतः हानि या दुःख ही देता है बिलकुल वैसे ही जैसे छाया पुत्र शनि करता है...! अचानक हानि या अचानक लाभ देने की अद्भुत क्षमता है इसमें अर्थात देने पर आये तो कुछ भी दे सकता है और लेने पर आये तो सब कुछ ले सकता है...! ------------------------------- इसकी शक्ति का आलम यह है कि स्पष्ट ग्रह ना होने के बाद भी इसके अस्तित्व को सभी मानते हैं, इस बात का प्रमाण 18 वर्षों की इसकी ज्योतिषीय महादशा और सभी ग्रहों के साथ अन्तर्दशा एवं प्रत्यंतर दशा का होना है...! ------------------------- इसकी स्थिति और परिणामों को लेकर ज्योतिष में बहुत मतभेद हैं लेकिन फिर भी मिथुन या वृषभ राशि में यह उच्च का माना जाता है लेकिन जन्म कुंडली में तृतीय, षष्टम और एकादश भाव में यह अच्छा परिणाम देता है...! ------------------------- ऐसी मान्यता है कि अपारम्परिक विवाह, अचानक या अनैतिक धन प्राप्ति और किसी को भ्रमित करने में इसको महारथ हासिल है और ऐसा ही देखने में भी आता है...! -------------------------- कुंडली में केतु के अतिरिक्त राहु ही ऐसा ग्रह है जो कभी भी सूर्य से अस्त नहीं होता है और सदैव वक्री गति से गोचर में भ्रमण करता रहता है...! ज्योतिष में राहु, नैसर्गिक रूप से पाप ग्रहों की श्रेणी में आता है और तामसिक गुण इसकी प्रकृति है...! सूर्य, चन्द्रमा और मंगल राहु के नैसर्गिक शत्रु हैं और बुध, शुक्र और शनि इसके नैसर्गिक मित्र हैं..! 18 वर्षों की इसकी ज्योतिषीय दशा होती है और गोचर में यह एक राशि में शनि के बाद सबसे अधिक 18 माह या डेढ़ वर्ष रहता है...! कुंडली में गोचर में यह 3, 6, 11 वें भाव को प्रभावित करता है अर्थात गोचर में शनि के बाद सबसे कम शुभ फल यही देता है...! ---------------------------------- ज्योतिष में राहु विदेश, अनैतिक कार्य, जुआ, कारावास, पर्यटन, अवैध शारीरिक सम्बन्ध, झूठ बोलना, तांत्रिक क्रियाएं, असामाजिक एवं अपरम्परागत कार्य, तामसिक कार्य, असाध्य रोग इत्यादि का कारक माना जाता है लेकिन अचानक धन प्राप्ति और अचानक बर्बादी में इसका विशेष महत्त्व...! मात्र इतने से ही पता चलता है कि किसी व्यक्ति के जीवन में राहु का क्या महत्त्व हो सकता है अर्थात कोई भी इनसे बच नहीं सकता है...! --------------------------------- सामान्य धारणा है कि ज्योतिष में राहु की दशा या अन्तर्दशा या गोचर अशुभ ही होता है और लोग डरते भी हैं लेकिन यह जानकारी के आभाव में ही होता है, जो की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं हैं...! लेकिन मेरा लम्बा ज्योतिषीय अनुभव यह कहता है कि किसी भी व्यक्ति को राहु से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है बल्कि समय रहते अपने राहु को जानने एवं समझने की है...! ----------------------------- अतः सभी जातकों से मेरा अनुरोध है कि आप अपने राहु के बारे में जरूर जानें और इसके साथ ही जीवन में इसकी शुभता में वृद्धि एवं अशुभता में कमी या राहु से अधिकतम लाभ एवं न्यूनतम हानि के लिए समय रहते किसी शिक्षित, ज्ञानी और अनुभवी ज्योतिषी से ही अवश्य संपर्क कर परामर्श प्राप्त करें...! 🙏🌹🌹🙏 अग्रिम शुभकामनायें ...! सुभाष वर्मा ज्योतिषाचार्य कुंडली, नामशास्त्री, रंगशास्त्री, अंकशास्त्री, वास्तुशास्त्री, मुहूर्त ------------------------------------- केवल ज्योतिष - चमत्कार नहीं आत्मविश्वास बढ़ाएं - अन्धविश्वास भगाएं www.astroshakti.in [email protected] www.facebook.com/astroshakti

Written & Posted By : Subhash Verma Astrologer
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