लग्न में लग्नेश (वृषभ में शुक्र)

लग्न में लग्नेश (वृषभ में शुक्र) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, लेकिन क्या ऐसा ही होता है या कितने प्रतिशत ऐसा हो पाता है...! जन्म कुंडली में वृषभ लग्न में लग्नेश शुक्र यदि लग्न में ही बैठा हो तो क्या-क्या हो सकता है, यह जानने का प्रयास करते हैं :- ------------------------------------------- एक तरफ जन्म कुंडली में वृषभ लग्न में लग्नेश के रूप में बैठा शुक्र सामान्यतः अच्छे एवं सुखद परिणाम ही देता है, विशेषकर अपनी महादशा और अन्तर्दशाओं में भी, जीवन में सबसे अधिक सुखद समय की प्राप्ति केवल गोचर के शुक्र के माध्यम से ही संभव है, शुक्र के केंद्र में होने से कुलदीपक नाम योग का भी निर्माण होता है अर्थात एक सुखी एवं सम्पन्न परिवार, केंद्र में अपनी ही राशि में होने से अर्थात केंद्र में स्वगृही होने से मालव्य योग का भी निर्माण होता है अर्थात दूसरों को पालने वाला एवं वाहन और मकान का मालिक होने का सौभाग्य अर्थात व्यक्ति का स्वभाव एवं जीवन भोग विलास से परिपूर्णतया वाला रहता है ऐसी सम्भावना की अधिकता रहती है...! विवाहित जीवन की गुणवक्ता और गुप्त रोगों को भी यह प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है...! -------------------------------------------------- लेकिन दूसरी तरफ ज्योतिष के बालादि अवस्था के अनुसार वृषभ राशि (जो एक सम राशि है) में शुक्र 0 से 6 अंशों तक मृत अवस्था में, 6 से 12 अंशों तक वृद्ध अवस्था में और 24 से 30 अंशों तक बाल अवस्था में रहता है और इन अवस्थाओं में वह परिणाम देने में स्वाभाविक रूप से अक्षम ही होगा और ज्योतिष के एक अन्य नियम के अनुसार स्वराशि में होने के कारण यह शुक्र केवल 50% शुभ फल देने के लिए ही प्रतिबद्ध है, इसलिए यहाँ यह विरोधाभास का विषय भी है...! ------------------------------------------------- वृषभ लग्न में बैठे शुक्र पर उसके अंशों के आधार पर कम से कम शुक्र (राशि स्वामी के रूप में), सूर्य (कृतिका नक्षत्र का स्वामी), या चन्द्रमा (रोहिणी नक्षत्र का स्वामी) या मंगल (मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी) का प्रभाव भी रहेगा इसके अतिरिक्त बुध, बृहस्पति, शनि, राहु, केतु में से किसी एक का या एक से अधिक ग्रहों का या सभी ग्रहों का प्रभाव भी हो सकता है और ऐसे में उपरोक्त परिणामो में निश्चित रूप से फर्क या बदलाव संभव है...! -------------------------------------------------- उपरोक्त विवरण से यह स्पष्ट होता है कि वृषभ लग्न में अपनी ही राशि में लग्नेश के रूप में बैठा शुक्र जो प्रत्यक्ष रूप से शक्तिशाली एवं शुभ दिखता है वह भी सुखद परिणाम देने में ज्यादातर पीछे क्यों रह जाता है...! इसलिए लग्न में यदि लग्नेश बैठा हो तो भी ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं है...! आवश्यकता है समय रहते किसी शिक्षित, ज्ञानी, अनुभवी एवं विश्वसनीय ज्योतिषी से अपने लग्नेश अर्थात शुक्र के बारे में जानने और उसको समझने की...! 🙏🌹🌹🙏 अग्रिम शुभकामनायें ...! सुभाष वर्मा ज्योतिषाचार्य कुंडली, नामशास्त्री, रंगशास्त्री, अंकशास्त्री, वास्तुशास्त्री, मुहूर्त -------------------------------- केवल ज्योतिष - चमत्कार नहीं आत्मविश्वास बढ़ाएं - अन्धविश्वास भगाएं --------------------------------------- www.AstroShakti.in [email protected] www.facebook.com/astroshakti

Written & Posted By : Subhash Verma Astrologer
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