Jyotish Shakti

लग्नेश द्वादश में (धनु / बृहस्पति)

लग्नेश द्वादश में (धनु / बृहस्पति) ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य रोग या पीड़ा, हॉस्पिटल का आई...

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लग्न में लग्नेश (धनु में बृहस्पति)

लग्न में लग्नेश (धनु में बृहस्पति) "लग्नेश सदैव शुभ फल ही देता है" सामान्यतः हम सभी यही पढ़ते या सुनते आये हैं और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो...

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कुछ होता क्यों नहीं

कुछ होता क्यों नहीं अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि ढेरों उपाय और ज्यादा धन व्यय करके भी कुछ नहीं हुआ या कुछ नहीं होता है और ऐसे में स्वाभाविक है कि सारा दोष उपाय कराने वाले या बताने वाले पंडित, ज...

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लग्नेश द्वादश में (वृश्चिक / मंगल)

लग्नेश द्वादश में (वृश्चिक / मंगल) ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य रोग या पीड़ा, हॉस्पिटल का आई...

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लग्न में लग्नेश (वृश्चिक में मंगल)

लग्न में लग्नेश (वृश्चिक में मंगल) "लग्नेश सदैव शुभ फल ही देता है" सामान्यतः हम सभी यही पढ़ते या सुनते आये हैं और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो...

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ज्योतिष सीखें - जागरूक बनें

ज्योतिष सीखें - जागरूक बनें ज्योतिष जरूरी क्यों (1) यदि हम एक सरल, सुखद एवं सफल जीवन के लिए कम से कम आठवीं या दसवीं तक की शिक्षा को जरूरी मानते हैं तो ज्योतिष की कम से कम सामान्य जानकारी भी ...

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स्वयं सिद्ध मुहूर्त (शुभ दिवस)

स्वयं सिद्ध मुहूर्त (शुभ दिवस) प्रचलित मान्यता है या ऐसा माना जाता है या कहा जाता है कि "यदि कोई कार्य किसी शुभ समय या काल में आरम्भ किया जाय तो उसकी सफलता की पूरी सम्भावना रहती है" और इसको मान ...

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विवाहित जीवन में बाधा क्यों

विवाहित जीवन में बाधा क्यों सामान्यतः सभी के विवाहित जीवन में समय समय पर कुछ ना कुछ समस्याएं अवश्य आती ही रहती हैं इसलिए इसको एक सामान्य सी होने वाली नैसर्गिक प्रक्रिया मान सकते हैं या मानना भी चा...

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लग्नेश द्वादश में (तुला / शुक्र)

लग्नेश द्वादश में (तुला / शुक्र) ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य रोग या पीड़ा, हॉस्पिटल का आईसी...

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लग्न में लग्नेश (तुला में शुक्र)

लग्न में लग्नेश (तुला में शुक्र) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल ही देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, लेकिन क...

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द्वादश में केतु

द्वादश में केतु ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मोक्ष, मृत्यु, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य रोग या पीड़ा, हॉस्पिटल का आईसीयू, बदनामी या ला...

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लग्न में केतु

लग्न में केतु एक तरफ केतु की पहचान पाप और अशुभ ग्रह अर्थात कष्ट कारक एवं शारीरिक कष्ट के कारक ग्रह के रूप में है तो दूसरी तरफ इसको मोक्ष का कारक भी माना जाता है इसीलिए यह द्वादश भाव के कारक के रूप...

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कुछ उपयोगी सुझाव

कुछ उपयोगी सुझाव इंसान की यह स्वाभाविक प्रवृत्ति है कि वह अपने सुखद और सफल जीवन के लिए हर संभव प्रयास करता रहता है लेकिन शायद ही वह कभी प्राप्त परिणामों से संतुष्ट हो पाता है अर्थात असंतुष्टि जीवन...

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लग्नेश द्वादश में (कन्या / बुध)

लग्नेश द्वादश में (कन्या / बुध) ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य रोग या पीड़ा, हॉस्पिटल का आईसीय...

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सरल वास्तु सुझाव

सरल वास्तु सुझाव 1. घर में सफाई के लिए पोंछा नमक के पानी का लगाएं एवं अंदर से बाहर की तरफ ही पोंछा लगाने की प्रक्रिया को अपनाएं 2. रसोईघर में कुछ भी बनाते समय मुहँ पूर्व की तरफ ही होना चाहिए 3. ...

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जीवन की शब्दावली

जीवन की शब्दावली मानव जीवन में बहुत सारी शब्दावलियाँ हैं लेकिन यदि समय रहते कुछ शब्दावली में थोड़ा सा बदलाव कर लिया जाय तो निश्चित रूप से जीवन में स्थिति और अधिक सुखद हो सकती है इसलिए वो कौन सी शब्...

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लग्न में लग्नेश (कन्या में बुध)

लग्न में लग्नेश (कन्या में बुध) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल ही देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, लेकिन क्...

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नौ ग्रह और नौ सुझाव

नौ ग्रह और नौ सुझाव इंसान की फितरत या चाहत या स्वाभाव ही कुछ ऐसी है की वह अपनी समस्याओं से सम्बंधित प्रश्न या सवाल बाद में करता है पहले वह कोई बढ़िया सा शक्तिशाली उपाय के लिए निवेदन कर देता है ताक...

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असंतुष्ट जीवन

असंतुष्ट जीवन वैसे तो इंसान की फितरत ही कुछ ऐसी होती है कि उसकी इच्छा सदैव "थोड़ा और - थोड़ा और" की रहती है अर्थात वह कभी भी संतुष्ट रह ही नहीं सकता है या संतुष्ट हो ही नहीं पाता है क्योंकि वह अपनी इ...

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लग्नेश द्वादश में (सिंह / सूर्य)

लग्नेश द्वादश में (सिंह / सूर्य) ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य रोग या पीड़ा, हॉस्पिटल का आईसी...

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लग्न में लग्नेश (सिंह में सूर्य)

लग्न में लग्नेश (सिंह में सूर्य) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल ही देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, लेकिन क...

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द्वादश में राहु

द्वादश में राहु ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य रोग या पीड़ा, हॉस्पिटल का आईसीयू, बदनामी या ला...

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लग्न में राहु

लग्न में राहु राहु एक पाप ग्रह है, क्रूर ग्रह नहीं है क्योंकि एक तरफ यह जीवन में भोग-विलास, धन प्राप्ति, पद-प्रतिष्ठा, इच्छानुकूल परिणाम प्राप्ति में सहायक रहता है तो दूसरी तरफ व्यक्तिगत सम्बन्ध, ...

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जीवन में बाधा और देरी

जीवन में बाधा और देरी समस्याओं से ग्रस्त लगभग सभी लोगों की ज्योतिषी से सामान्यतः एक ही शिकायत या प्रार्थना रहती है कि "मेरे जीवन में बाधाएं बहुत ज्यादा आती है" या "हर काम में रुकावट ज्यादा आती ह...

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सभी को समर्पित

सभी को समर्पित ज्योतिषीय गणना या विश्लेषण में देश, काल, पात्र की जानकारी का होना पहली और आवश्यक प्राथमिकता है और इसमें भी समय का सबसे अधिक महत्त्व है क्योंकि हम सभी को यह सदैव याद रखना चाहिए कि मा...

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राहु से सावधान

राहु से सावधान जी हाँ, राहु से सावधानी ज़रूरी है (डरना नहीं है) क्योंकि कोई भी इसके प्रभाव से या इससे बच नहीं सकता है । सर्वविदित है कि ज्योतिष में सभी नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, ...

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लग्नेश द्वादश में (कर्क / चन्द्रमा)

लग्नेश द्वादश में (कर्क / चन्द्रमा) ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य रोग या पीड़ा, हॉस्पिटल का आ...

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लग्न में लग्नेश (कर्क में चन्द्रमा)

लग्न में लग्नेश (कर्क में चन्द्रमा) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल ही देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, ले...

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लग्नेश द्वादश में (मिथुन / बुध)

लग्नेश द्वादश में (मिथुन / बुध) ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य पीड़ा, हॉस्पिटल का आईसीयू, बदना...

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लग्न में लग्नेश (मिथुन में बुध)

लग्न में लग्नेश (मिथुन में बुध) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, लेकिन क्या ...

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वास्तु का महत्त्व

वास्तु का महत्त्व वास्तु का नाम आते ही सामान्यतः सबसे पहले हमारे दिमाग में ईशान कोण, अग्नि कोण, मुख्य द्वार, खिड़की, दरवाजे, पूजा स्थल आदि का ध्यान आता है अर्थात मकान कैसा बना होना चाहिए लेकिन वास्...

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लग्नेश द्वादश में (वृषभ / शुक्र)

लग्नेश द्वादश में (वृषभ / शुक्र) ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य पीड़ा, हॉस्पिटल का आईसीयू, बदन...

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ग्रह या आप

ग्रह या आप जब भी कोई कष्ट में होता है तो अंततः (सामान्यतः) वह किसी ज्योतिषी के पास अपनी कुंडली दिखाने या अपनी समस्या के समाधान के लिए जाता है और बदले में ज्योतिषी उसको उसके कष्टों के लिए जिम्मेदार ...

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ज्योतिष से नैसर्गिक जुड़ाव

ज्योतिष से नैसर्गिक जुड़ाव सामान्यतः ज्योतिष को लेकर सबके मन में कहीं ना कहीं एक जिज्ञासा जरूर रहती है लेकिन कुछ लोग सार्वजानिक रूप से या सार्वजानिक जीवन में इसको स्वीकार करते हैं तो कुछ नहीं करते ...

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ज्योतिष में 40% और 60%

ज्योतिष में 40% और 60% भारतीय ज्योतिष के अनुसार किसी भी व्यक्ति के जीवन में अधिकतम सुख 40% और न्यूनतम कष्ट 60% ही निर्धारित है अर्थात जीवन में सुख काल (समय) 40% से कम ही रहेगा और कष्ट काल 60% से अ...

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लग्न में लग्नेश (वृषभ में शुक्र)

लग्न में लग्नेश (वृषभ में शुक्र) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, लेकिन क्या...

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लग्नेश द्वादश में (मेष / मंगल)

लग्नेश द्वादश में (मेष / मंगल) ज्योतिषीय कुंडली में द्वादश भाव व्यय भाव के नाम से जाना जाता है अर्थात मृत्यु, मोक्ष, ज्यादा व्यय, बड़ी शारीरिक एवं आर्थिक हानि, असाध्य पीड़ा, हॉस्पिटल का आईसीयू, बदनाम...

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ज्योतिष जरूरी क्यों

ज्योतिष जरूरी क्यों यदि हम एक सरल, सुखद एवं सफल जीवन के लिए कम से कम आठवीं या दसवीं तक की शिक्षा को जरूरी मानते हैं तो ज्योतिष की कम से कम सामान्य जानकारी भी सभी को होनी चाहिए ऐसा भी हमें मानन...

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विज्ञान - ज्योतिष - आध्यात्म

विज्ञान - ज्योतिष - आध्यात्म विज्ञान जीवन को गति देता है, ज्योतिष जीवन को स्पष्ट दिशा देती है और आध्यात्म से विवेक (बुद्धि का सही इस्तेमाल) मिलता है और इंसानी जीवन भी इन्हीं तीनों में समाहित है अर...

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लग्न में लग्नेश (मेष में मंगल )

लग्न में लग्नेश (मेष में मंगल ) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, लेकिन क्या ...

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ज्योतिष और भ्रांतियां

ज्योतिष और भ्रांतियां कुंडली में यदि ग्रह शुभ या मजबूत हैं तो ज्यादा खुश होने की आवश्यकता नहीं है, और यदि ग्रह अशुभ या कमजोर हैं तो ज्यादा दुखी होने की भी आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हर पीली और चमकन...

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ज्योतिष क्यों और कैसे

ज्योतिष क्यों और कैसे जीवन में सुख और सफलता में बृद्धि और समस्याओं में कमी के लिए ज्योतिष को स्वयं जानना और समझना अर्थात सीखना ही चाहिए ...? विशेष बात यह है कि जिस प्रकार एक सुखद जीवन के लिए सामान...

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ज्योतिषीय केतु और आप

ज्योतिषीय केतु और आप ज्योतिष में जब कभी भी ग्रहों की बात होती है तो उसमें केतु की चर्चा कम ही होती है, ऐसा मेरा अनुभव है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इससे केतु का महत्त्व कम हो जाता है...! यह बिलकु...

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ज्योतिषीय राहु और आप

ज्योतिषीय राहु और आप ज्योतिषीय ग्रहों के परिवार में राहु को स्पष्ट मान्यता नहीं है क्योंकि इसको छाया ग्रह का दर्जा प्राप्त है या छाया ग्रह माना जाता है, इसलिए यह छाया की तरह कभी भी दृश्य या अदृश...

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ज्योतिषीय शनि और आप

ज्योतिषीय शनि और आप *********************** ज्योतिषीय ग्रहों के परिवार में शनि को एक तरफ न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है तो दूसरी तरफ सेवक के रूप में भी इनकी पहचान है...! मात्र इतने से ही पता चलता ...

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ज्योतिषीय शुक्र और आप

ज्योतिषीय शुक्र और आप *********************** ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जीवन में आवश्यकता से अधिक अर्थात भोग एवं विलासता के साधन और संसाधन की प्राप्ति के लिए शुक्र का अच्छा होना बहुत ही आवश्यक है...!...

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ज्योतिषीय बृहस्पति और आप

ज्योतिषीय बृहस्पति और आप ************************** ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सुखद, संतुष्ट एवं सफल जीवन और विवाहित जीवन के लिए बृहस्पति का अच्छा होना बहुत ही आवश्यक है...! यह मात्र एक वाक्य ही किस...

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ज्योतिषीय बुध और आप

ज्योतिषीय बुध और आप ********************** ज्योतिष में बुध, नैसर्गिक शुभ ग्रहों की श्रेणी में आता है और राजसिक गुण इसकी प्रकृति है... 17 वर्षों की इसकी ज्योतिषीय दशा होती है और गोचर में यह एक राश...

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ज्योतिषीय मंगल और आप

ज्योतिषीय मंगल और आप ************************ भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रहों के परिवार में सूर्य और चन्द्रमा के बाद मंगल का नाम आता है, और इसको क्रूर ग्रहों की श्रेणी में रखा जाता है लेकिन यह, क्रू...

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ज्योतिषीय चन्द्रमा और आप

ज्योतिषीय चन्द्रमा और आप (Astrological Post) ********************************************* भारतीय ज्योतिष में चन्द्रमा को मन का कारक माना जाता है अर्थात व्यक्ति की मानसिकता और भावुकता को नियंत्रित ...

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ज्योतिषीय सूर्य और आप

ज्योतिषीय सूर्य और आप ************************ भारतीय ज्योतिष के अनुसार सूर्य किसी के भी जीवन में सफलता के जबरजस्त करक ग्रह हैं। ज्योतिष में सभी नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र...

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बुद्धादित्य योग (शिक्षा का स्तर)

बुद्धादित्य योग (शिक्षा का स्तर) **************************** प्रचलित सामान्य ज्योतिषीय मान्यता है कि यदि जन्म या लग्न कुंडली में सूर्य और बुध एक साथ हो तो "बुद्धादित्य योग" बनता है, जो जातक को अच्...

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ज्योतिषीय दृष्टिकोण में सुःख एवं दुःख

ज्योतिषीय दृष्टिकोण में सुःख एवं दुःख ********************************* भारतीय ज्योतिष के अनुसार किसी के भी जीवन में सुःख एवं दुःख से सम्बंधित जो भी प्राप्ति होती है वह जन्मकालीन योग एवं ज्योति...

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कुंडली में "नभस योग"

कुंडली में "नभस योग" ******************** वैदिक ज्योतिष में ज्योतिषीय योगों का बहुत महत्त्व है अर्थात किसी भी कुंडली में विभिन्न प्रकार के अनेकों योग होते हैं...! सामान्यतः ऐसे योग अपनी दशाओं में ह...

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कष्टकारी बृहस्पति

कष्टकारी बृहस्पति ****************** वैसे तो सभी ग्रहों का अपना महत्त्व है लेकिन बृहस्पति सबके लिए बहुत ही ख़ास है क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में जो भी कुछ पाता है उसमें बृहस्पति की भूमिका जर...

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कुंडली अच्छी - परिणाम विपरीत

कुंडली अच्छी - परिणाम विपरीत ******************************* अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि कुंडली में उच्च के ग्रह और केंद्र या त्रिकोणों में बैठे ग्रहों के बावजूद भी जीवन में कुछ अच्छा नहीं हो...

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कष्टकारी चन्द्रमा

कष्टकारी चन्द्रमा *************** वैसे तो इंसानी जीवन में सभी ग्रहों का अपना अपना महत्त्व है लेकिन चन्द्रमा का इसमें विशेष महत्त्व है, क्योंकि व्यक्ति का मन एवं मस्तिष्क सीधे तौर पर इसके प्रभाव में...

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शनि और आप

शनि और आप *************** यदि किसी की जन्म या लग्न कुंडली में शनि ग्रह लग्न, लग्नेश और चन्द्रमा अर्थात तीनों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहा हो तो उस व्यक्ति की मनोदशा विचलित मिलेगी, जीवन भ्रम ...

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धन प्राप्ति योगों का भ्रम

धन प्राप्ति योगों का भ्रम जन्म कुंडली या लग्न कुंडली किसी की भी हो निश्चित रूप से सभी में अनेकों प्रकार के योग विद्यमान रहते हैं, स्वाभाविक रूप से सभी का झुकाव और जिज्ञासा धन प्राप्ति या धन योगो...

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ज्योतिषीय योगों का भ्रम

ज्योतिषीय योगों का भ्रम जन्म कुंडली या लग्न कुंडली किसी की भी हो निश्चित रूप से सब में अनेकों प्रकार के योग विद्यमान रहते हैं, स्वाभाविक रूप से ज्योतिषीय दृष्टिकोण में कुछ योग शुभ और कुछ योग अशुभ...

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लग्न या लग्नेश की स्थिति

लग्न या लग्नेश की स्थिति यदि जन्म या लग्न कुंडली में लग्न या लग्नेश का द्वादश, द्वादशेश, मंगल और शनि या इनमें से किसी दो का भी सम्बन्ध प्रत्यक्ष रूप से हो तो व्यक्ति के अंदर भ्रम की स्थिति रहती ...

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कुंडली में राजयोग का भ्रम

कुंडली में राजयोग का भ्रम जो भी लोग थोड़ा बहुत ज्योतिष के संपर्क में रहते हैं उन सभी लोगों को लगता है कि जन्म कुंडली या लग्न कुंडली में जितने ज्यादा राजयोग होंगें जीवन उतना ही ज्यादा खुशहाल और व...

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उच्च ग्रहऔर नीच ग्रह का भ्रम

उच्च ग्रहऔर नीच ग्रह का भ्रम लगभग सभी लोग ऐसा जानते और मानते हैं कि यदि जन्म या लग्न कुंडली में एक या ज्यादा से ज्यादा उच्च के ग्रह होंगें तो जीवन बहुत ही वैभवशाली और सुखी होगा और यदि कुंडली में एक...

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ज्योतिष शक्ति

ज्योतिष शक्ति पहली बात यह कि मानव जीवन में बहुत कुछ पूर्व निर्धारित है और इसमें ज्यादा बदलाव संभव नहीं है अर्थात मानव खूँटें में बंधे एक बैल की तरह होता है अर्थात उसकी अपनी एक निश्चित सीमाएं होती ...

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कुंडली का द्वादश भाव

कुंडली का द्वादश भाव किसी भी व्यक्ति के जीवन में जन्म कुंडली (लग्न कुंडली), चंद्र कुंडली और नवमांश कुंडली का विशेष महत्व है । यदि किसी की कुंडली में लग्नेश अपने से 12 वें घर (भाव) या द्वादश भाव म...

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जीवन के दस सूत्र

जीवन के दस सूत्र किसी भी व्यक्ति के जीवन में मुख्य रूप से दस सूत्र हैं जो उसके जीवन की दिशा और दशा को निर्धारित करते हैं । व्यक्ति का जन्म दिनांक, जन्म का समय, जन्म का स्थान, माता और पिता । ये जीवन...

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सूर्य से सफलता

भारतीय ज्योतिष के अनुसार सूर्य किसी के भी जीवन में सफलता के जबरजस्त करक ग्रह हैं। ज्योतिष में सभी नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतू) में इनको राजा के रूप में माना ए...

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ज्योतिष - समस्या या समाधान

ज्योतिष - समस्या या समाधान ज्योतिष किसी के लिए समस्या है तो किसी के लिए समाधान, बल्कि अक्सर ऐसा होता है कि एक ही व्यक्ति को ज्योतिष कभी समस्या लगती है तो कभी समाधान, ऐसा क्यों है यह जानने का एक ईमा...

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शनि से सावधान

शनि से सावधान जी हाँ, शनि से सावधानी ज़रूरी है क्योंकि कोई भी इससे बच नहीं सकता है । ज्योतिष में इसको सभी नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु एवं केतू) में न्यायाधीश के रू...

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राशिफल का भ्रमजाल

भारत में शायद ही कोई वयस्क व्यक्ति होगा जिसका प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से राशिफल से वास्ता ना पड़ा हो उसके अपने जीवन में अर्थात राशिफल से सभी लोग वाकिफ हैं । इससे सहमत होना या ना होना अ...

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नियमित बीमारी एवं दवा

यदि किसी घर में पूरे वर्ष कोई ना कोई बीमार रहता है अर्थात पूरे वर्ष किसी ना किसी की दवाई चलती रहती है तो निश्चित रूप से अन्य कारणों के अलावा घर का वास्तु भी इसका एक मुख्य कारण है । यहाँ विशेष बात यह ह...

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ज्योतिषीय मुहूर्त (Astrological Auspicious Time)

ऐसी मान्यता है कि यदि किसी भी कार्य का आरम्भ अच्छे समय में किया जाय तो उस कार्य के सफल होने की संभावना अत्यधिक रहती है । ज्योतिष में इसी अच्छे समय को मुहूर्त कहते हैं । भारतीय ज्योतिष के अनुसार मानव ज...

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ज्योतिष - ज्योतिषी – जातक

ज्योतिष भारतीय प्राचीन ग्रंथों एवं शास्त्रों के अनुसार कुल 9 ग्रहों, 27 नक्षत्रों, 12 राशियों की आकाश गंगा में स्थिति एवं गति या चाल की गणना करने की जो पद्धति या विधि है वह ज्योतिष कहलाता है । इसके न...

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ज्योतिष में मूल समस्या-III

ज्योतिष में मूल समस्या-III ज्योतिष से सम्बन्ध रखने वाले एवं इसके जानने वाले लोगों को यह अच्छी तरह मालूम है कि ज्योतिषी बनने के लिए किसी की भी जन्म कुंडली में कुछ विशेष योग एवं विशेष ग्रह स्थिति होत...

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ज्योतिष में मूल समस्या-II

ज्योतिष में मूल समस्या-II आजकल संचार माध्यम या मीडिया वाले अपने ज्योतिष कार्यक्रम में ग्लैमर, मसालेदार या लच्छेदार शब्दों का प्रयोग कर लोगों की भावनाओं का व्यावसायिक दोहन कर रहे हैं । इस दौड़ में को...

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ज्योतिष में मूल समस्या-I

ज्योतिष में मूल समस्या-I जैसा की सर्वविदित है कि आजकल ज्योतिष एवं जातक के बीच एक अविश्वास की दिवार खड़ी हो गयी है । ऐसी स्थिति क्यों आयी है इसके लिए थोड़ा पीछे जाना आवश्यक हो गया है । एक समय था जब भग...

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ज्योतिषीय जरूरी जानकारी-III

ज्योतिषीय जरूरी जानकारी-III भारतीय ज्योतिष मूलतः देश-काल-पात्र के साथ साथ ज्योतिषीय - भाव, राशि, ग्रह, नक्षत्र, दशा, गोचर, जन्म कालीन योग पर आधारित है। इन सबकी ज्योतिषीय गणना एवं विश्लेषण (Astrolog...

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ज्योतिषीय जरूरी जानकारी-II

ज्योतिषीय जरूरी जानकारी-II ज्योतिष में मूल रूप से जिन शब्दों (जैसे : ग्रहों के नाम, राशियों के नाम, नक्षत्रों के नाम, तिथियों के नाम के अलावा तिथियों के प्रकार के नाम, उत्तरायण, दक्षिणायन, मुहूर्त...

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ज्योतिषीय जरूरी जानकारी-I

ज्योतिषीय जरूरी जानकारी-I ज्योतिष अर्थात ज्योति + ईश अर्थात ईश्वर द्वारा प्रदत्त वह ज्योति जिसके माध्यम से आकाश गंगा में स्थित सभी नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुद्ध, बृहस्पति, शुक्र, शनि और छाया...

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ज्योतिषीय गणना की विश्वसनीयता

सर्वप्रथम ज्योतिष की विश्वसनीयता के बारे में जानना ज़रूरी है । और इसकी विश्वसनीयता का आलम यह है कि शायद ही कोई होगा जो इससे अछूता होगा, यहाँ तक कि सरकार भी इनको मानती है जिसका परिणाम यह है कि कई धर्मों...

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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही क्यों ? सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (संक्रमण) का दिन मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है। और ज्योतिषीय गणना के अनुसार 14 जनवरी 2020 की मध्य रात्रि 26:06...

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