ज्योतिषीय शनि और आप

ज्योतिषीय शनि और आप *********************** ज्योतिषीय ग्रहों के परिवार में शनि को एक तरफ न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है तो दूसरी तरफ सेवक के रूप में भी इनकी पहचान है...! मात्र इतने से ही पता चलता है कि किसी व्यक्ति के जीवन में शनि का क्या महत्त्व हो सकता है अर्थात कोई भी इनसे बच नहीं सकता है...! -------------------------------------- ज्योतिष में शनि, नैसर्गिक रूप से पाप ग्रहों की श्रेणी में आता है और तामसिक गुण इसकी प्रकृति है...! 19 वर्षों की इसकी ज्योतिषीय दशा होती है और गोचर में यह एक राशि में सबसे अधिक 30 माह या ढ़ाई वर्ष रहता है...! कुंडली में गोचर में यह 3, 6, 11 वें भाव को प्रभावित करता है अर्थात गोचर में सबसे कम शुभ फल यही देता है...! कुंडली में यह सूर्य से 16 अंशों तक (सीधी एवं वक्री गति में) अस्त रहता है और तुला इसकी उच्च राशि और मेष इसकी नीच राशि होती है...! बुध और शुक्र इसके नैसर्गिक मित्र हैं जबकि सूर्य, चन्द्रमा एवं मंगल इसका नैसर्गिक शत्रु है...! कुंडली में सप्तम भाव में स्थित शनि दिग्बली ग्रहों की श्रेणी में आता है और शुभ फल देने के योग्य माना जाता है...! वृषभ और तुला लग्न की कुंडली में शनि योग कारक ग्रह के रूप में जाना जाता है...! जन्म कुंडली में छठें भाव, अष्टम भाव, दशम भाव और द्वादश भाव का कारक है शनि...! ------------------------------- ज्योतिष में शनि न्यायालय, अधिकाँश एवं असाध्य बिमारी, आयु, मृत्यु, जेल, विदेश, राजनीति, तामसिक कर्म, जीवन में अधिकाँश बाधाओं इत्यादि का कारक माना जाता है लेकिन विवाह एवं विवाहित जीवन में इसका विशेष महत्त्व...! ----------------------------- पुरुष और स्त्री दोनों के लिए और सभी उम्र में इसका शुभ होना बहुत जरूरी है अन्यथा जीवन में स्वास्थ के साथ साथ और बहुत सारी समस्याएं हो सकती हैं...! महिलाओं के लिए शनि विशेष होता है क्योंकि स्वास्थ, विवाह, विवाहित जीवन के सुखों पर शनि का विशेष प्रभाव होता है अर्थात महिलाओं के लिए सुखद जीवन का प्रतीक है ..! --------------------------------- सामान्य धारणा है कि ज्योतिष में शनि की दशा या अन्तर्दशा या गोचर अशुभ ही होता है और लोग डरते भी हैं लेकिन यह जानकारी के आभाव में ही होता है, जो की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं हैं...! अत्यंत सोचनीय बात यह है कि लोग अपने पिछले और वर्तमान कर्मों को नहीं देखते हैं और शनि के प्रकोप से बचने के उपायों में ही लगे रहते हैं, ऐसे में परिणाम की कल्पना सहज ही की जा सकती है...! ----------------------------------- ऐसी भी धारणा है कि शनि किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन में बहुत कुछ दे सकता है लेकिन दे नहीं पाता है क्योंकि कभी दशा तो कभी गोचर तो कभी योग आड़े आ जाते हैं और ऐसे में यह अपने आपको असमर्थ पाता है या हो जाता है, लेकिन मेरा लम्बा ज्योतिषीय अनुभव यह कहता है कि व्यक्ति अपने पिछले और वर्तमान कर्मों के कारण शनि से सुख कम और दुःख ज्यादा पाता है क्योंकि हमें यह भी याद रखना चाहिए कि शनि को न्यायाधीश और सेवक भी कहा जाता है...! कुछ लोग इस बात को मानते हैं तो कुछ लोग इसको नहीं मानते हैं क्योंकि सबका अपना अपना बौद्धिक स्तर है, लेकिन मैं तो इसको पूरी तरह मानता हूँ...! --------------------------------- अतः सभी जातकों से मेरा अनुरोध है कि आप अपने शनि के बारे में जरूर जानें और इसके साथ ही जीवन में इसकी शुभता में वृद्धि एवं अशुभता में कमी या शनि से अधिकतम लाभ एवं न्यूनतम हानि के लिए समय रहते किसी शिक्षित, ज्ञानी और अनुभवी ज्योतिषी से ही अवश्य संपर्क कर परामर्श प्राप्त करें...! 🙏🌹🌹🙏 अग्रिम शुभकामनायें ...! सुभाष वर्मा ज्योतिषाचार्य ज्योतिषाचार्य, नामशास्त्री, रंगशास्त्री, अंकशास्त्री, वास्तुशास्त्री, कुंडली, मुहूर्त --------------------------------- केवल ज्योतिष - चमत्कार नहीं आत्मविश्वास बढ़ाएं - अन्धविश्वास भगाएं www.astroshakti.in [email protected] www.facebook.com/astroshakti

Written & Posted By : Subhash Verma Astrologer
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