लग्न में लग्नेश (मेष में मंगल )

लग्न में लग्नेश (मेष में मंगल ) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, लेकिन क्या ऐसा ही होता है या कितने प्रतिशत ऐसा हो पाता है...! ---------------------------------------- जन्म कुंडली में मेष लग्न में लग्नेश मंगल यदि लग्न में ही बैठा हो तो क्या-क्या हो सकता है, यह जानने का प्रयास करते हैं :- -------------------------------------- 1. 00.00 से 3.20 अंशों तक और 23.20 से 26.40 अंशों तक का मंगल सबसे अच्छी स्थिति में होता है क्योंकि यहाँ मंगल पर मंगल का ही प्रभाव रहता है -------------------------------------- 2. 3.20 से 6.40 अंशों तक और 20.00 से 23.20 अंशों तक का मंगल, शुक्र के प्रभाव में रहता है अर्थात परिणाम के लिए कुंडली में शुक्र की स्थिति भी देखनी होगी ------------------------------------- ३. 6.40 से 10.00 अंशों तक और 16.40 से 20.00 अंशों तक का मंगल, बुध के प्रभाव में रहता है अर्थात परिणाम के लिए कुंडली में बुध की स्थिति भी देखनी होगी ------------------------------------- 4. 10.00 से 13.20 अंशों तक का मंगल, चन्द्रमा के प्रभाव में रहता है अर्थात परिणाम के लिए कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति भी देखनी होगी ------------------------------------- 5. 13.20 से 16.40 अंशों तक का मंगल, सूर्य के प्रभाव में रहता है अर्थात परिणाम के लिए कुंडली में सूर्य की स्थिति भी देखनी होगी ------------------------------------- 6. 26.40 से 30.00 अंशों तक का मंगल, बृहस्पति के प्रभाव में रहता है अर्थात परिणाम के लिए कुंडली में बृहस्पति की स्थिति भी देखनी होगी ------------------------------------- 7. 00.00 से 13.20 अंशों तक मंगल, अश्विनी नक्षत्र में होता है अर्थात इसके स्वामी ग्रह केतु की स्थिति भी कुंडली में देखनी होगी ------------------------------------- 8. 13.20 से 26.40 अंशों तक मंगल, भरणी नक्षत्र में होता है अर्थात इसके स्वामी ग्रह शुक्र की स्थिति भी कुंडली में देखनी होगी -------------------------------------- 9. 26.40 से 30.00 अंशों तक मंगल, कृतिका नक्षत्र के पहले चरण में होता है अर्थात इसके स्वामी ग्रह सूर्य की स्थिति भी कुंडली में देखनी होगी -------------------------------------------- 10. इसके अतिरिक्त एक तरफ मेष राशि में 0 से 6 अंशों तक मंगल बाल अवस्था (बालादि अवस्था) में रहता है तो दूसरी तरफ रुचक नामक योग का निर्माण भी करता है (यह विरोधाभास का भी विषय है) और स्वराशि में होने के कारण यह 50% शुभ फल देने के लिए ही प्रतिबद्ध है ------------------------------------ उपरोक्त विवरण से यह स्पष्ट होता है कि मेष लग्न में अपनी ही राशि में लग्नेश के रूप में बैठा मंगल जो प्रत्यक्ष रूप से शक्तिशाली दिखता है उस पर उसके (मंगल) और केतु के अतिरिक्त चन्द्रमा, सूर्य, बुध, बृहस्पति, शुक्र (इनमें से किसी एक का या अधिक ग्रहों) का भी प्रभाव हो सकता है, इसीलिए लग्नेश के परिणामों में भिन्नता मिलती है --------------------------------------------- अर्थात लग्न में यदि लग्नेश बैठा हो तो भी ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं है...! आवश्यकता है समय रहते किसी शिक्षित, ज्ञानी, अनुभवी एवं विश्वसनीय ज्योतिषी से अपने लग्नेश अर्थात मंगल के बारे में जानने और उसको समझने की...! 🙏🌹🌹🙏 अग्रिम शुभकामनायें ...! सुभाष वर्मा ज्योतिषाचार्य कुंडली, नामशास्त्री, रंगशास्त्री, अंकशास्त्री, वास्तुशास्त्री, मुहूर्त --------------------------- केवल ज्योतिष - चमत्कार नहीं आत्मविश्वास बढ़ाएं - अन्धविश्वास भगाएं www.astroshakti.in [email protected] www.facebook.com/astroshakti

Written & Posted By : Subhash Verma Astrologer
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