ग्रह या आप

ग्रह या आप जब भी कोई कष्ट में होता है तो अंततः (सामान्यतः) वह किसी ज्योतिषी के पास अपनी कुंडली दिखाने या अपनी समस्या के समाधान के लिए जाता है और बदले में ज्योतिषी उसको उसके कष्टों के लिए जिम्मेदार अशुभ या कमजोर ग्रहों के बारे में बताता है, और फिर प्रारम्भ होता है अशुभ ग्रहों को शुभ या कमजोर ग्रह को मजबूत करने के उपाय या उपायों का लंबा सिलसिला और अंततः (सामान्यतः) सम्बंधित व्यक्ति को निराशा ही हाथ लगती है और वह अपने आपको ठगा हुआ ही महसूस करता है, विशेष बात यह है कि इसके एक नहीं अनेकों कारण होते हैं जैसे कि समस्याओं को, अपने आपको और जीवन क्रिया को ना जान पाना इत्यादि...! ------------------------ अब यहाँ एक स्पष्ट प्रश्न उठता है कि क्या अशुभ ग्रहों को शुभ या कमजोर ग्रहों को मजबूत अर्थात ग्रहों की नैसर्गिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार से क्या कोई बदलाव किया जा सकता है या क्या ऐसा संभव है...? इसको जानने और समझने के लिए एक ईमानदार प्रयास करते हैं...! ------------------------ जग प्रसिद्ध "महाभारत" के युद्ध के दौरान एक प्रसंग में श्री कृष्ण अपनी नीति के अंतर्गत यह घोषणा करते हैं कि "सूर्य" अस्त हो गया है अर्थात अब आज का युद्ध यहीं समाप्त होता है लेकिन सूर्य अस्त नहीं होता है बल्कि उसके आगे बादलों का ढ़ेर लग जाता है जिससे यह आभास होता है कि सूर्य अस्त हो गया है, जबकि सूर्य अभी अस्त नहीं हुआ होता है, क्योंकि अभी उसके अस्त होने का समय ही नहीं हुआ होता है ------------------------ तात्पर्य यह कि जब श्री कृष्णा के रूप में स्वयं नारायण समय से पहले सूर्य को अस्त नहीं कर सकते अर्थात ग्रहों की नैसर्गिक प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं कर सकते तो क्या वर्तमान में कलयुग का कोई मानव किसी ग्रह की नैसर्गिक प्रक्रिया को बदल सकता है अर्थात अशुभ ग्रह को शुभ या कमजोर ग्रह को मजबूत कर सकता है, तो इस सम्बन्ध में मेरा व्यक्तिगत मानना है कि बिलकुल नहीं...! फिर भी इसका उत्तर आप अपने बौद्धिक स्तर के अनुसार सोचने और पाने के लिए पूर्णतया स्वतंत्र है इसलिए एक ईमानदार प्रयास अवश्य कीजियेगा...! ------------------------ अंततः अब प्रश्न यह उठता है कि कुंडली में ग्रह यदि प्रतिकूल या अशुभ या कमजोर है तो क्या किया जाय, तो उत्तर सीधा सा है कि आप या तो ग्रहों को बदलो या अपने आपको...? स्वाभाविक है कि ग्रहों को आप बदल नहीं सकते तो अपने आप को ही बदलना होगा आपको और यह बात जितनी जल्दी समझ में आ जाए उतना ही अच्छा है आपके लिए अन्यथा नीयत और नियति का खेल तो चलता ही रहेगा जीवन भर...! ------------------------ आज समाज में आत्मविश्वास बढ़े और अन्धविश्वास भागे इसी के सन्दर्भ में मैनें यह लेख अपने अभी तक प्राप्त ज्योतिष ज्ञान, ज्योतिष शिक्षा, ज्योतिषीय अनुभव, सामाजिक अनुभव, एवं व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर लिखा है, इसलिए उपरोक्त पर सहमति या असहमति के लिए आप पूर्णतया स्वतंत्र हैं...! ------------------------ उपरोक्त के परिपेक्ष में और अधिक स्पष्टता के लिए यदि आप स्वयं ज्योतिष सीख लें तो अति उत्तम होगा अन्यथा आप किसी शिक्षित, ज्ञानी, अनुभवी एवं विश्वसनीय ज्योतिषी से समय रहते परामर्श प्राप्त कर निश्चित रूप से अधिक लाभान्वित हो सकते हैं...! 🙏🌹🌹🙏 अग्रिम शुभकामनायें ...! सुभाष वर्मा ज्योतिषाचार्य कुंडली, नामशास्त्री, रंगशास्त्री, अंकशास्त्री, वास्तुशास्त्री, मुहूर्त --------------------------------- केवल ज्योतिष - चमत्कार नहीं आत्मविश्वास बढ़ाएं - अन्धविश्वास भगाएं www.AstroShakti.in [email protected] www.facebook.com/AstroShakti

Written & Posted By : Subhash Verma Astrologer
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