लग्न में लग्नेश (कर्क में चन्द्रमा)

लग्न में लग्नेश (कर्क में चन्द्रमा) ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि लग्नेश सदैव शुभ फल ही देता है और यदि वह लग्न में ही बैठा हो तो क्या कहना अर्थात सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है, लेकिन क्या ऐसा ही होता है या कितने प्रतिशत ऐसा हो पाता है...! जन्म कुंडली में कर्क लग्न में लग्नेश चन्द्रमा यदि लग्न में ही बैठा हो तो क्या-क्या हो सकता है, यह जानने का प्रयास करते हैं :- ------------------------ जन्म कुंडली में कर्क लग्न में लग्नेश के रूप में बैठा चन्द्रमा सामान्यतः अच्छे एवं सुखद परिणाम ही देता है, विशेषकर अपनी महादशा, अन्तर्दशाओं और गोचर में, कर्क लग्न में बैठा चन्द्रमा अपने अतिरिक्त बृहस्पति या शनि या बुध या सूर्य या मंगल या शुक्र के अलावा राहु या केतु के प्रभाव में हो सकता है, चूँकि यह सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह इसलिए इसके परिणामों को पकड़ना बहुत मुश्किल कार्य है और यह कभी वक्री गति से नहीं चलता है एवं एक राशि में लगभग सवा दो दिन ही रहता है सूर्य से नजदीकी इसको प्रभावहीन बनती है एवं सूर्य से दूरी इसको प्रभावशाली बनती है अर्थात अमावस्या के दिन यह पूर्णतया निष्क्रिय रहता है और पूर्णमासी के दिन यह पूर्णतया प्रभावशाली रहता है ------------------------ कुंडली में कर्क लग्न में चन्द्रमा यदि अकेला हो और मजबूत स्थिति में हो तो व्यक्ति का जीवन वैभवशाली एवं प्रभावशाली हो सकता है लेकिन यदि निर्बल (शनि, राहु या केतु के प्रभाव में) हुआ तो व्यक्ति पूरे जीवन इससे सम्बंधित असाध्य बिमारी से पीड़ित हो सकता है विशेष बात यह है कि कुंडली में शनि और राहु या केतु का प्रत्यक्ष प्रभाव व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ एवं विवाहित या पारिवारिक जीवन के लिए किसी भी प्रकार से उत्तम नहीं हो सकता है ------------------------ ज्योतिष के बालादि अवस्था के अनुसार कर्क राशि (जो एक सम राशि है) में चन्द्रमा 0 से 6 अंशों तक मृत अवस्था में, 6 से 12 अंशों तक वृद्ध अवस्था में और 24 से 30 अंशों तक बाल अवस्था में रहता है और इन अवस्थाओं में वह स्वाभाविक रूप से कोई भी लाभकारी परिणाम देने में अक्षम ही होगा और ज्योतिष के एक अन्य नियम के अनुसार स्वराशि में होने के कारण यह चन्द्रमा केवल 50% शुभ फल देने के लिए ही प्रतिबद्ध है, इसलिए यहाँ यह विरोधाभास का विषय भी है...! ------------------------ उपरोक्त संभावित परिणामों में शनि, राहु और केतु की अहम भूमिका होगी क्योंकि यह तीनों ग्रह केवल प्रतिकूल परिणाम ही देंगें, तब जब वह कुंडली या गोचर में चन्द्रमा को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेंगें...! ------------------------ उपरोक्त विवरण से यह स्पष्ट होता है कि कर्क लग्न में अपनी ही राशि में लग्नेश के रूप में बैठा चन्द्रमा जो प्रत्यक्ष रूप से शक्तिशाली एवं शुभ दिखता है वह भी सुखद परिणाम देने में ज्यादातर पीछे क्यों रह जाता है इसलिए लग्न में यदि लग्नेश भी बैठा हो तो भी ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं है...! आवश्यकता है समय रहते किसी शिक्षित, ज्ञानी, अनुभवी एवं विश्वसनीय ज्योतिषी से अपने लग्नेश अर्थात चन्द्रमा के बारे में अधिक से अधिक जानने और उसको समझने की...! 🙏🌹🌹🙏 अग्रिम शुभकामनायें ...! सुभाष वर्मा ज्योतिषाचार्य कुंडली, नामशास्त्री, रंगशास्त्री, अंकशास्त्री, वास्तुशास्त्री, मुहूर्त ---------------------------- केवल ज्योतिष - चमत्कार नहीं आत्मविश्वास बढ़ाएं - अन्धविश्वास भगाएं www.AstroShakti.in [email protected] www.facebook.com/AstroShakti

Written & Posted By : Subhash Verma Astrologer
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