ज्योतिषीय गणना की विश्वसनीयता

सर्वप्रथम ज्योतिष की विश्वसनीयता के बारे में जानना ज़रूरी है । और इसकी विश्वसनीयता का आलम यह है कि शायद ही कोई होगा जो इससे अछूता होगा, यहाँ तक कि सरकार भी इनको मानती है जिसका परिणाम यह है कि कई धर्मों के तीज-त्यौहार का निर्धारण भी ज्योतिष के माध्यम से ही होता है । जिसको सभी मानते भी हैं । वास्तव में यह एक उन्नत किस्म का गणितीय विज्ञान है, जिसको हम ज्योतिषीय गणितीय विज्ञान (Astro Mathemetical Science) भी कह सकते हैं । जहाँ तक ज्योतिषीय गणना का सवाल है तो यह विषय बहुत ही व्यापक है । जन्म से लेकर मृत्यु तक अर्थात व्यक्ति के पूरे जीवन में अनेकों प्रकार की ज्योतिषीय गणनाएं होती हैं । एक निश्चित समय पर अमावस्या और पूर्णिमा आएगी या एक निश्चित समय पर सूर्योदय या सूर्यास्त होगा इत्यादि का निर्धारण भी ज्योतिषीय गणना के माध्यम से ही जाना जाता है । ज्योतिषीय गणना एक सूक्ष्म एवं जटिल गणितीय प्रक्रिया है । इसको पूरी तरह जानने वाले तो आज मिलेंगें ही नहीं बल्कि अच्छी तरह से जानने वाले भी चुनिंदा लोग ही होंगें लेकिन वे भी आम जनता को उपलब्ध नहीं हो सकते हैं । इसके एक नहीं अनेकों कारण हैं । जहाँ तक इसकी गणना को मानने का सवाल है तो कुछ लोग इसको विश्वास के कारण मानते हैं तो कुछ लोग इसको मज़बूरी में मानते हैं वहीँ कुछ लोग इसको अप्रत्यक्ष रूप से मानते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करते हैं अर्थात हम यह कह सकते हैं कि ज्योतिष गणना को अशिक्षित से लेकर उच्च शिक्षित तक सभी मानते हैं, बेशक स्वरुप और परिस्थियाँ ज़रूर भिन्न भिन्न हो सकती हैं । और यह मेरा स्वयं का ज्योतिषीय एवं व्यक्तिगत अनुभव भी है । यह बिलकुल वैसा ही है जैसे कि लोगों का धार्मिक ग्रन्थ रामायण और गीता को मानना और ना मानना । जबकि रामायण और गीता का अपना स्तीत्व है और किसी के मानने या ना मानने से उसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला । जैसा कि हम सभी लोग सुनते हैं या मानते हैं या पढ़ते हैं कि पुराने ज़माने में राजा- महाराजा लोग अपने पास व्यक्तिगत ज्योतिषी को रखते थे, जो केवल उन्हीं के लिए काम करता था, अर्थात उस समय यह एक राजसी एवं प्रतिष्ठा का विषय था, लेकिन काल-चक्र के प्रवाह में आज यह महलों से उतर कर फुटपाथ पर आ पहुंचा है । बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि कुछ शातिर लोगों ने ज्योतिष को एक चमत्कारिक विषय के रूप में प्रचारित एवं प्रसारित कर दिया है और लगभग सभी लोगों के दिमाग में यह बात अच्छे से बैठ भी गयी है । यही इसकी विश्वसनीयता की मुख्य समस्या है । अंततः ज्योतिष की गणना करने वाला व्यक्ति इस क्षेत्र का कितना ज्ञानी एवं अनुभवी है और उसकी गणनाओं की व्याख्या करने की शैली कैसी है, यह बात भी मुख्य रूप से गणना सुनने वाले व्यक्ति के लिए इसकी विश्वसनीयता के स्तर को सुनिश्चित करती है । लेकिन एक बात तो सत्य है कि गणना गलत होने से ज्योतिष गलत नहीं हो जाता है बिलकुल वैसे ही जैसे कि रामायण और गीता की गलत व्याख्या करने से उसका महत्व कम नहीं हो जाता है । मैं यहाँ पुनः यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि किसी व्यक्ति विशेष के सन्दर्भ में ज्योतिषीय गणना एक अति जटिल प्रक्रिया है और आम जनता को इसको प्राप्त करना आज के समय में लगभग असंभव है । लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि ज्योतिष के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में निश्चित रूप से अनुकूलता में बृद्धि और प्रतिकूलता में कमी सुनिश्चित कर सकता है । यहाँ यह भी याद रहे कि भारतीय ज्योतिष के अनुसार मानव जीवन में अधिकतम सुःख 40% और न्यूनतम दुःख 60% निर्धारित है । आवश्यकता है केवल एक ज्ञानी एवं अनुभवी ज्योतिषी की । यह कभी ना भूलें की ज्योतिष एक उच्च स्तरीय गणितीय विज्ञान के साथ-साथ आस्था का विषय भी है । आज समाज में आत्मविश्वास बढ़े और अन्धविश्वास भागे इसी के सन्दर्भ में मैनें यह लेख अपने प्राप्त ज्योतिष ज्ञान, ज्योतिष शिक्षा, ज्योतिषीय अनुभव, सामाजिक अनुभव, एवं व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर लिखा है । लेखक एवं प्रस्तुति सुभाष वर्मा ज्योतिषाचार्य Facebook.com/jyotishshakti [email protected] www.astroshakti.in

Written & Posted By : Subhash Verma Astrologer
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